कोविड-19 महामारी से लैंगिक असमानता और ज़्यादा बढ़ गई है। बच्चों व बुज़ुर्गों की देखभाल और घरेलू कामकाज का सारा बोझ महिलाओं पर पड़ रहा है। एक अनुमान के अनुसार भारत में अप्रैल में तालाबन्दी लागू होने के बाद, हर 10 में से 4 महिलाओं का आय वाला रोज़गार ख़त्म हो गया है।
भारतीय कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी 2005 में 35 प्रतिशत थी जो घटकर 25.5 प्रतिशत पर आ गई है और लॉकडाउन ने इस संख्या को और भी नीचे धकेल दिया है।
2 साल बाद अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की तारीख में बदलाव करते हुए साल 1913 में इसे 8 मार्च कर दिया गया और तब से इसे हर साल इसी दिन मनाया जाता है. अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस दुनियाभर के विभिन्न क्षेत्रों में काम करने वाली महिलाओं की आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक उपलब्धियों के जश्न के तौर पर मनाया जाता है
- संयुक्त राष्ट्र के अंडर-सेक्रेटरी जनरल और संयुक्त राष्ट्र महिला के कार्यकारी निदेशक, फुमज़िले मल्म्बो-न्गुका द्वारा महिलाओं, शांति और सुरक्षा पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन, भवन निर्माण में महिलाओं की भूमिका को मजबूत करने और शांति के लिए प्रतिबद्धताओं के लिए प्रतिबद्ध है।
